बेनेट यूनिवर्सिटी से आईआईआईटी नागपुर तक का सफ़र!
बीते महीने की बात है फरवरी शुरू हुए कुछ 8-10 दिन ही हुए थे सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था मसूरी ट्रिप से हम सब दोस्त लौटे ही थे। 3-4 दिन से रोज़ मेरा दोस्त जयंत कुछ न कुछ नए आइडियाज ला रहा था एक नए स्टार्टअप का इस बारे में फिर कभी बताऊंगा। एक दिन लंच के बाद हम पांच दोस्त माही, मैं, जिया, जयंत और यशवी फुटबॉल ग्राउंड पर बैठे थे। बहुत खाली खाली सा लग रहा था वही रोज़ के काम क्लासेज, असाइनमेंट्स और वहीं सब। कुछ अलग करना चाहिए सबसे हटके। बैठे-बैठे बात निकली कि दूसरी यूनिवर्सिटीज कॉलेजेस के कंपटीशन में हमें भी भाग लेना चाहिए। इसी बहाने सीवी में जोड़ने लायक कुछ काम दिखेगा। इंटरनेट पर मैंने दो तीन प्रतियोगिताएं देखी फिर अचानक ही दिमाग का बल्ब जला और मैंने सोचा क्यों न ऐड मैड कंपटीशन में पार्ट लिया जाएं क्योंकि पिछले साल बेनेट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने ऐड मैड कंपटीशन का आयोजन किया था जिसमें हमने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। ऐड मैड कंपटीशन में सबसे ऊपर आईआईआईटी नागपुर की प्रतियोगिता आ रही थी। उस प्रतियोगिता की गाइडलाइंस पढ़ने के बाद हमने निर्णय लिया कि इसमें भाग लेते है कुछ न कुछ तो सीखने को मिलेगा। आईआईआईटी नागपुर द्वारा दी गई गाइडलाइंस के मुताबिक हमें किसी भी एक प्रोडक्ट के बारे में 30 सेकंड के अंदर ऐड बनाना था। चाहे वह ब्रांड बाज़ार में उपस्थित हो या कोई काल्पनिक ब्रांड या प्रोडक्ट भी हो सकता है। ऐड बनाकर ऑनलाइन लिंक पर सबमिट करना था अगर वह ऐड सिलेक्ट होता है तो हमें दो दिन नागपुर बुलाया जाएगा और वहां उनके दिए गए विषय पर ऐड बनाना रहेगा। कुछ इस तरह हमने अनायास ही बैठे-बैठे नागपुर तक की प्लानिंग करली।
अब एक दो दिन बीते और हम पांचों ने 'टीम 5 स्टार' के नाम से रजिस्ट्रेशन करवा लिया। बहुत सोच विचार के हमारे कॉलेज के प्रोफेसर्स से विमर्श करने के बाद हम एक निष्कर्ष पर पहुंचे कि एक पेंसिल की कंपनी का ऐड बनाते है जिसका 25% प्रॉफिट गर्ल चाइल्ड एजुकेशन में जाता है। कंपनी का नाम दिया गया 'अपलिफ्ट पेंसिल्स'। बहुत जल्दबाजी में ऐड बना और जैसा भी बना हमने ऑनलाइन दी गई लिंक पर सबमिट कर दिया। अगले दिन हमें पता पड़ता है कि हम सिलेक्ट हो गए हैं। हमारी खुशी का ठिकाना न रहा।
अब नागपुर की तैयारी शुरू कर दी टिकट्स बुक कर लिए गए। 27 फरवरी को हम नागपुर के लिए निकले 28 की सुबह नागपुर पहुंचे होटल में चेक इन किया एक दिन पूरा नागपुर घूमा मज़ा आ गया। कमाल का शहर है नागपुर खाने का भी सब व्यवस्थित तरीके से मिल गया, बड़ी और चौड़ी सड़कें, काफी अच्छा लग रहा था सब। सुबह नाश्ता करा फिर होटल में गए। एक चीज़ जो सबसे खराब थी वह थी गर्मी हम दिल्ली से निकले थे दिल्ली में उस समय ठंड थी और आहिस्ता-आहिस्ता ठंड जा रही थी। नागपुर पहुंचते ही भयंकर गर्मी, चेटने वाली धूप। शाम को मौसम के शांत होने के बाद हम निकले वापिस घूमने रात में नागपुर की सराफा चौपाटी में खाना खाया। अगले दिन हम जल्दी सुबह नागपुर से 25-30 किलोमीटर दूर आदिलाबाद नागपुर रोड़ स्थित वारंगा गांव में आईआईआईटी नागपुर के लिए निकले। कैब का बंदोबस्त जयंत की मामीजी ने करवा दिया था। आईआईआईटी पहुंचते ही हमारा स्वागत सत्कार इस कदर हुआ कि हम बड़े वीआईपी हैं और स्वागत होगा भी क्यों न हम उनके मेहमान जो थे। पहले दिन हमारे कंपटीशन की ब्रीफिंग दी गई टॉपिक जो हमें दिया गया वह था 'अंकल चिप्स' अब अंकल चिप्स के इंटरनेट पर जितने भी ऐड थे वह सब पुराने थे आज की भाषा में कहें तो 'नोस्टाल्जिया' लाने वाले थे। हमने एक कहानी बनाई क्लास में एक बच्चे के बैग में से दूसरा बच्चा अंकल चिप्स का पैकेट निकाल लेता है सभी लोग उसके पीछे भागते हैं फिर वह गिर जाता है और उसे उठाने के बजाए सभी बच्चे अंकल चिप्स का पैकेट खाने में व्यस्त रहते है। इतने में एक बच्चा उसे उठाता है और फिर सब लोग खाते है पीछे से मेरी आवाज़ में टैग लाइन आती है "चटपटी दोस्ती का चटपटा स्वाद क्रंची क्रिस्पी और मसालेदार फ्लेवर्स के साथ अंकल चिप्स वही स्वाद वही पसंद अब पहले से 25% एक्स्ट्रा!" लो भई अब ये सबकुछ तीस सेकंड के अंदर शूट करके अगले दिन डेडलाइन के पहले हमने सबमिट कर दिया था।
जब रिजल्ट्स की बारी आई तब हमारा ऐड सबसे पहले चलाया गया और जज ने जब रिजल्ट अनाउंस किए सबके मार्क्स के साथ उसमें हम चौथे स्थान पर रहें। हम सभी को कोई प्राइज न मिल पाने का अफसोस लग रहा था पर बजाए उदास होने के हम दुगने उत्साह के साथ आईआईआईटी नागपुर के फेस्ट के आखिरी दिन को एंजॉय करते रहें। अगले दिन वहीं कैब हमें आईआईआईटी लेने आ चुकी थी। वहां से नागपुर के फेमस श्रुति रेस्टोरेंट पर लंच करने के बाद, रेलवे स्टेशन पर करीब 1 बजे हम पहुंचे और ट्रेन में बैठकर अगले दिन सुबह दिल्ली पहुंच चुके थे। इस सफ़र ने मुझे सिखाया कि जल्दबाजी में लिए गए निर्णय भी कई बार सफल हो जाते है बशर्ते कि आप सावधानीपूर्वक अपने विवेक से निर्णय लें और काम करें। ~ नैवेद्य पुरोहित
#आईआईआईटी_नागपुर
#बेनेट_यूनिवर्सिटी


बहुत बढ़िया ब्लॉग, लिखा है, आप सब टीम 5 स्टार को, आगे के लिए गुड विशेस, लगे रहो *मंजिल तो मिल ही जाएगी.... भटककर ही सही, गुमराह तो वो है जो निकले ही नहीं*
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