बेनेट में बदलाव की बयार !
सदियों से कहा जाता रहा है कि परिवर्तन ही संसार का नियम है।पिछले कुछ समय से बेनेट यूनिवर्सिटी में काफ़ी बदलाव देखने को मिले हैं। ये कुछ ऐसे बदलाव हुए है जिन्हें सभी धीरे धीरे स्वीकार कर रहें है किसी व्यक्ति के लिए बदलाव को आसानी से स्वीकारना सरल होता है तो किसी को थोड़ी कठिनाई आती है पर समय के साथ सभी को हुए बदलाव कि आदत हो जाती है। यूनिर्वसिटी में हुए बीते दिनों जो भी कुछ बदलाव हुए है उनमें सबसे ज्यादा जो चर्चा हो रही है वह मुख्य रूप से सिर्फ दो विभागों की हो रही है जिनके हाल ही में डीन बदले गए। पहला स्कूल ऑफ़ कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जिनके पुराने डीन प्रोफ़ेसर दीपक गर्ग के जाने के बाद नए डीन डॉ. अभय बंसल की नियुक्ति हुई। दूसरा टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया के एचओडी प्रो. सुनील सक्सेना के सेवानिवृत होने के बाद नए डीन प्रो. डॉ. संजीव रत्ना सिंह की जो नियुक्ति हुई है उसने सबको 'क्यों हिला डाला ना' वाली परिस्थिति में रख दिया है। वाकई जो बदलाव टाइम्स स्कूल ऑफ़ मीडिया के इतिहास में अब तक नहीं हुए थे वह सब कुछ हो रहा है। टीवी स्टूडियो और रेडियो स्टुडियो का सौंदर्यीकरण, प्लेकॉम बोर्ड का गठन, नया सिलेबस नए सब्जेक्ट्स जैसे तमाम बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
दो महीने से ज्यादा की छुट्टियां बीता कर ब्रेक के बाद वापिस हॉस्टल आएं कई बच्चों ने रूम एलॉटमेंट प्रोसीजर पर नकारात्मक प्रतिक्रिया ज़ाहिर की इन्हीं में से एक स्कूल ऑफ़ कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बीटेक सीएसई सेकेंड ईयर के छात्र आदित्य दुबे का कहना है कि "जिस दिन मेरी रिपोर्टिंग थी उस दिन मैं आया काफी ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। तीन से चार घंटे लाइन में लगा रहना पड़ा उसके बाद हमारा नंबर आया। जो रूममेट्स की जानकारी हमने कॉलपॉल पर दी थी उसके साथ कमरा सिर्फ़ इस वजह से नहीं मिला क्योंकि वह दूसरे कोर्स का है!"
टाइम्स स्कूल ऑफ़ मीडिया से बीए जेएमसी थर्ड सेमेस्टर के छात्र ओम शिवरे का कहना है, "दो महीने के लंबे वेकेशन के बाद काफी अच्छा लग रहा है एक बार वापिस क्लासेस स्टार्ट हो गई है नया करिकुलम बहुत अच्छा है ग्रुप प्रोजेक्ट्स मिल रहे है जिससे क्लास का एनवायरमेंट सही दिशा में जा रहा है। प्लेसमेंट कमिटी बोर्ड जो नया बना है ये स्टूडेंट्स को एनकोरेज कर रहा है।"
कुलमिलाकर, ये जितने भी बदलाव दिख रहे है इनसे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। कोई भी चीज स्थिर कभी नहीं रहती समय के साथ परिर्वतन बेहद जरूरी है शायद इसीलिए महान दार्शनिक हेराक्लिटस ने कहा था, "द ओनली कॉन्स्टेंट इन लाइफ इस चेंज"।
~ नैवेद्य पुरोहित

Comments
Post a Comment