मेरी पहली इंटरनेशनल फ्लाइट
विगत दिनों मैं दुबई यात्रा पर था.... यात्रा मनुष्य के जीवन का एक ऐसा हिस्सा जो हमें तरोताजा महसूस करा देती हैं समस्त मानसिक शारीरिक तनावों को दूर कर देती हैं। मैंने यह दुबई यात्रा के बाद महसूस किया। वैसे तो मैं बचपन से ही भारत के विभिन्न राज्यों में कई सारी जगह घूम चुका हूं कश्मीर से लेकर केरल तक , गुजरात से लेकर सिक्किम तक और भी कई सारी जगह पर इस बार की मेरी यात्रा पहली अंतर्राष्ट्रीय यात्रा थी। जिसे मैं कभी नहीं भूला पाऊंगा !
बहरहाल, आते हैं अब मेरी दुबई यात्रा पर...इसकी प्लानिंग मेरी ऐंड सेमेस्टर एग्जाम्स के दौरान हो गई थी टिकट्स वगेरह आने-जाने के सबकुछ दिसंबर के अंत तक हो गया था ! मेरे घरवालों के और मेरे बीच सब चीज़ों की सूत्रधार मेरी बुआजी की बेटी याने मेरी बड़ी बहन सेजल दीदी (नन्नू दीदी) रही। वे अपने पति विशाल जैन के साथ दुबई रहती हैं। दोनों की एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी हैं Sunshy Digital Media Agency दीदी की बहुत दिनों से बड़ी आशा थी कि मैं अपने भाइयों को अपने घर बुलाऊ और कुछ दिन घुमाऊ फिराऊ। चूंकि यह समय दुबई घूमने के लिए अतिउत्तम हैं लिहाज़ा हम तीन भाई मैं , विन्नी (दीदी का सगा छोटा भाई) और लक्की भैया (दीदी के बड़े पापा के बेटे) दुबई यात्रा के लिए सहमत हो गए। 27 जनवरी को वे दोनों भाई इंदौर से मुंबई के लिए निकले और मैं दिल्ली से मुंबई। मुंबई में हम तीनों भाई मिले और उसके बाद अबू धाबी के लिए रवाना हो गए। यूएई के समयानुसार रात साढ़े ग्यारह बजे करीब हम अबू धाबी एयरपोर्ट पर पहुंच चुके थे। दीदी जियाजी अपनी कार में बेसब्री से हमारा इंतजार कर रहे थे।एयरपोर्ट पर फटाफट कार में सामान रख कर अब हम घर के लिए निकल पड़े अबू धाबी से दुबई लगभग एक-डेढ़ घंटे का सफ़र है। रस्तेभर हमने खूब बातचीत की और घर पहुंचने के बाद भी रातभर हम गपशप करते रहें...। अगले दिन सुबह उठने के बाद घर की जो बालकनी का व्यू दिख रहा था उससे सुंदर दृश्य मैंने आज तक नहीं देखा था। घर के नीचे नहर उस पर तरह - तरह की यॉट्स एक तरफ़ दूर बड़ा सा विशाल होटल जो अटलांटिस के नाम से प्रसिद्ध है। दूसरी तरफ दुबई का प्रमुख शेख ज़ायद रोड यह एक ऐसा रोड था जिसे मैं इंदौर का एमजी रोड कहूं तो गलत ना होगा ! चारों तरफ कांच की गगनचुंबी इमारतें। दुबई मरीना एक बेहद पॉश सम्पन्न रिहायशी इलाका है।
28 जनवरी को हम वापिस अबू धाबी गए जहां दुनिया की सबसे बड़ी व्हाइट मार्बल से बनी हुई मस्जिद देखी। शेख ज़ायद ग्रैंड मस्जिद इसका निर्माण 1994 से 2007 के बीच किया गया था। जो यूएई के दिवंगत राष्ट्रपति शेख ज़ायद बिन सुल्तान अल नहयान द्वारा शुरू की गई थी 2004 में जब शेख ज़ायद की मृत्यु हो गई तो उन्हें मस्जिद के ही प्रांगण में दफना दिया गया। इस मस्जिद की खास बात ये है कि दुनिया का सबसे बड़ा हाथ से बुना हुआ कालीन इसमें बिछाया गया है। जो ईरान की कारपेट कंपनी द्वारा बनाया गया है जिसे ईरानी कलाकार अली खलीकी द्वारा डिजाइन किया गया है। इस कालीन का माप 60,570 स्क्वेयर फीट है जिसका वजन 35 टन है। कालीन के भीतर 2,268,000,000 गांठें हैं जिसे पूरा होने में लगभग दो साल लगे थे। रात में मस्जिद जिस तरह से गुलज़ार हो गई थी वह पूरा भव्य नजारा देखते बन रहा था। वह दिन हम सबके लिए एक शुभ संयोग ही था जब दीदी जियाजी दोनों ने रोलेक्स घड़ी खरीदी थी।
अगले दिन 29 जनवरी को हम तीनों भाई दुबई के फेमस बीच जेबीआर गए...जो कि हमारे घर से बमुश्किल 2 किलोमीटर दूर था। बीच हमारे लिए ऐसी बात हो गई थी जैसे अपने ही घर का हिस्सा हैं। वास्तव में था भी बहुत पास हम बीच पर कई बार गए। मैंने अब तक बहुत से बीच देखे दमन , दीव , केरल लेकिन दुबई जैसा बीच मैंने आज तक नहीं देखा ! बीच से लौटने के बाद मल्टी में स्विमिंग पूल के आंनद उठाए। मल्टी के स्विमिंग पूल के लाइफगार्ड भैया से हमने पहचान बना ली। रोज़ जब भी पूल जाते उन भैया से दुआ सलाम करते थे। रात में हम सब द सिटीवॉक दुबई घूमने निकले इस दौरान मैंने पाया कि वहां के लोग बहुत अनुशासित हैं। सब लोग नियम कायदों का सख्ती से पालन करते हैं। दुनिया की सबसे मशहूर लग्जरी कारें मैंने वहां देख ली रोल्स रॉयस , पोर्शे , लैंबोर्गिनी , फरारी , जी वैगन , बुगाटी सहित तमाम लग्जरी कारे सड़क पर दौड़ रही थी।
अब अगले दिन याने 30 जनवरी का वो दिन जिस दिन मुझे सबसे ज्यादा मज़ा आया क्योंकि हमने एक दिन में बहुत सारी आइकॉनिक जगह घूम ली थी बुर्ज अल अरब , अटलांटिस , रॉयल अटलांटिस , बुर्ज खलीफा सारे प्रमुख पर्यटन स्थल हमने उसी एक दिन में देख लिए थे। बुर्ज खलीफा की चकाचौंध के आगे मुझे सब कुछ फीका लग रहा था। बुर्ज खलीफा का वो फाउंटेन शो और लाइटिंग शो मेरे मन में हमेशा समाए रहेगा !
हम तीनों भाई अगले दिन 31 जनवरी को डेजर्ट सफ़ारी करने गए। वो अनुभव भी यादगार लम्हों में से एक था। सबसे पहले हमने ड्यून बैशिंग की मतलब पूरे रेगिस्तान में रेत के ऊपर कार की सवारी और वो कार भी टोयोटा की लैंड क्रूजर थी। बहुत मज़ा आया! फिर हमारे डेजर्ट सफारी के ही पैकेज में अरेबियन डांस और अंत में फायर शो भी शामिल था जो कि अपने आप में ही एक रमणीय चीज है।
अगले दिन 1 फरवरी को हम तीनों भाई मेट्रो से बुर दुबई वाले इलाके गए याने मीना बाजार ! ये वो इलाका था जिसे मैं छोटा इंडिया कहना चाहूंगा वहां लोग भी हमें अधिकतर भारतीय मिले कई दुकानों के नाम तो भारतीय शहरों के नाम पर थे जैसे कि मुंबई जूस सेंटर , मुंबई वड़ा पाव , मिनी पंजाब रेस्टोरेंट , मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स , कल्याण ज्वेलर्स , मीना ज्वेलर्स आदि। मीना बाजार से हमने एक परिचित की दुकान से कई सारे चॉकलेट्स के पैकेट , परफ्यूम्स लिए। मीना बाजार में गौर करने वाली बात यह भी थी कि जहां एक ओर हम इतने दिनों से दुबई के एकदम पॉश इलाको में घूम रहे थे जो साफ़ सफाई सुंदरता और चकाचौंध से भरा इलाका था लेकिन मीना बाजार में घुसते से ही हमें दीवारों पर पान की पीक थूकी हुई मिली। कई बिल्डिंगो के पेंट उखड़ रहे थे और हमें दुबई का एक अलग ही रूप देखने को मिला !
अभी तक मैं सिर्फ़ सोचता था कि यार क्रूज में बैठना है...यॉट का सफ़र करना है समुद्र में यात्रा करनी है...आखिरकार वो दिन भी आ ही गया 2 फरवरी को जब हम सब सुपर यॉट के सफर पर गए...वो अनुभव वो फील ही अलग थी। समुंदर के बीचोबीच लहरों की शोर के बीच हमारी क्रूज लहरों को चीर के आगे बढ़ रही थी...चारों तरफ़ दूर दूर तक समुद्र दिख रहा था और एक तरफ़ एक लंबी सी गगनचुम्बी इमारत बुर्ज खलीफा ! यॉट का सफ़र करने के बाद हम दुबई के दूसरे सबसे प्रसिद्ध बीच काइट बीच गए जहां हमने खूब मज़े किए।
अब हमारी यात्रा अंतिम पड़ाव पर पहुंचने वाली थी एक आखिरी दिन बाकी था क्योंकि 4 फ़रवरी को हमारी वापसी की उड़ान थी। हम तीनों भाइयों ने सोचा क्यों न एक बार फिर से बुर्ज खलीफा जाए क्योंकि उस दिन पहली बार में हमारा मन नहीं भरा था तत्पश्चात हम तीनों एक बार पुनः दुबई मेट्रो से बुर्ज खलीफा गए। वहीं लाइटिंग शो और फाउन्टेन शो देखा! अप्रतिम नज़ारा था। दुबई मेट्रो में सफर बेहद खूबसूरत रहा। मेट्रो से बाहर का नज़ारा देखने लायक था मेट्रो में हमने लगभग पूरा दुबई देख लिया था। वापिस जब घर लौटे तो थक चुके थे हम सब साथ में ही बैठे हुए थे इतने में दीदी के पास मैसेज आता है कि मेरी फ्लाइट जो 4 फरवरी को दोपहर 12:00 बजे की थी वह रात की 10:30 की हो गई है ! एक पल के लिए तो मैं चिंतित हो उठा कि दुबई से रात साढ़े दस की फ्लाइट याने दिल्ली मुझे सुबह तड़के तीन बजे उतारेगी...थोड़ी देर बाद मन में ख्याल आया कि एक दिन और घूमने का मिल गया! पर अब मैं अकेला हो चुका था क्योंकि दोनों भाइयों की इंदौर के लिए फ्लाइट तो टाईम पर थी और जब मैं सुबह उठा तो दीदी उन्हें छोड़कर आ चुकी थीं। उठने के कुछ ही देर बाद दीदी के पास पुनः मैसेज आया कि मेरी फ्लाइट वापस लेट हो गई है और अब 11:00 बजे की हो चुकी हैं ! अब मैं नहाके तैयार होके अकेला पैदल दुबई मरीना मॉल घूमने चले गया। जाते वक्त मल्टी के स्विमिंग पूल के लाइफगार्ड भैया से गुडबाय किया और मरीना मॉल का रास्ता पूछकर निकल पड़ा। इस दौरान रास्ते में कई सारे अनजान विदेशियों से मैंने उन्हें मेरा फोटो खींचने के लिए आग्रह किया और वे सभी लोगों ने बड़े प्रेमपूर्वक तरीके से मेरा फोटो खींचा। वापस घर जाते वक्त रास्ते में सोच रहा था कि काश मेरी फ्लाइट और डिले हो जाए पर कॉलेज भी आना था। वहीं सब रोज़ के कामकाज पढ़ाई असाइनमेंट्स जो 1 हफ़्ते के पेंडिंग हो चुके थे उन्हें भी पूरा करना था...! मरीना टैरेस मुझे हमेशा याद आएगा !
दुबई छोड़ने का मन नहीं हो रहा था... दुबई एयरपोर्ट पर जब दीदी जियाजी छोड़ने आए तो उन्हें बाय कहना मुश्किल हो रहा था। इन 9 दिनों में दीदी जियाजी दोनों से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। जिनकी वजह से मेरी ये दुबई यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हो पाई...जिन्होंने मुझे इतने दिनों तक बड़े लाड़ प्यार से रखा...खिलाया पिलाया....जगह जगह घुमाया...विश्व की मशहूर धरोहरे दिखाई....उन्हें बाय कहना बड़ा मुश्किल हो गया था। कैसे मैं उन्हें धन्यवाद दू जिनकी वजह से मैंने पहली अंतर्राष्ट्रीय उड़ान भरी...जिनकी वजह से मेरा ये सफ़र बहुत आसान हो गया...जिनकी वजह से मुझे कोई दिक्कत या तकलीफ़ नहीं आई...एयरपोर्ट पर मैंने दीदी जियाजी दोनों के चरण स्पर्श किए। और बहुत-बहुत आभार प्रकट किया।
आज मेरी दुबई यात्रा को एक महीना पूरा हो चुका हैं लेकिन न जानें क्यों उस जगह को...उस माहौल को भूला नहीं पा रहा हूं वरना अभी तक तो पिछले एक महीने से मैं सभी लोगों को ख़ासतौर से मेरे दोस्तों के बीच हर बात में दुबई को ले आता हूं चाहें कोई भी बात हो कहीं न कहीं से किसी न किसी तरीके या बहाने से मैं दुबई को जोड़ ही देता हूं। उम्मीद है कि आज इतना लिखने के बाद उस दुबई हैंगओवर से उतर ही जाऊंगा।
मैं बड़ा खुशकिस्मत हूं कि मुझे इतने अच्छे दीदी जियाजी मिले!
~ नैवेद्य पुरोहित
#मेरी_दुबई_यात्रा #दुबई_डायरीज



Its a really wonderful blog , one of the best blogs for dubai travel that i have read !
ReplyDeleteSalute to you my brother Nevedhaya !
दुबई जावे बिना ही, नैवेद्य तुमने हमे दुबई कैसा है दिखा दिया।
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया जानकारी दी।
यह सभी के लिए उपयोगी ब्लॉग है मेरे हिसाब से